त्योहारों की तारीख देखते समय केवल अंग्रेज़ी कैलेंडर की तारीख पर्याप्त नहीं होती। कई पर्व तिथि, सूर्योदय, प्रदोष, निशीथ या चंद्रोदय के आधार पर तय होते हैं। इसी वजह से अलग शहरों में पूजा का समय कुछ मिनट बदल सकता है। इस कैलेंडर में समय का आधार उज्जैन, मध्य प्रदेश रखा गया है—महाकाल की नगरी और भारतीय पंचांग परंपरा का एक महत्वपूर्ण केंद्र।
2026 में अब कौन-कौन से बड़े त्योहार बाकी हैं?
सितंबर 2026 के अंतिम सप्ताह से साल के अंत तक श्राद्ध पक्ष, शारदीय नवरात्रि, दशहरा, करवाचौथ, दीपावली, छठ, देवउठनी एकादशी, कार्तिक पूर्णिमा और गीता जयंती जैसे प्रमुख पर्व आते हैं। नीचे तारीख, तिथि, मुख्य मुहूर्त और सरल तरीके से मनाने की जानकारी दी गई है।
| पर्व | तारीख | तिथि / मुख्य समय | कैसे मनाएं |
|---|---|---|---|
| भाद्रपद पूर्णिमा / पूर्णिमा श्राद्ध | 26 सितंबर 2026, शनिवार | पूर्णिमा: 25 सितंबर 23:06 से 26 सितंबर 22:18 | स्नान, दान, विष्णु/सत्यनारायण पूजा और परिवार की परंपरा अनुसार पूर्णिमा श्राद्ध। |
| पितृ पक्ष प्रारंभ | 27 सितंबर 2026, रविवार | प्रतिपदा श्राद्ध से पितृ पक्ष का आरंभ | पूर्वजों का स्मरण, तर्पण और मृत्यु-तिथि के अनुसार श्राद्ध। दिखावे की जगह श्रद्धा और सादगी को महत्व दें। |
| सर्वपितृ अमावस्या | 10 अक्टूबर 2026, शनिवार | अमावस्या तिथि 9 अक्टूबर रात से 10 अक्टूबर रात तक | जिन पितरों की तिथि ज्ञात न हो, उनके लिए भी इस दिन श्राद्ध-तर्पण किया जाता है। |
| शारदीय नवरात्रि / घटस्थापना | 11 अक्टूबर 2026, रविवार | प्रतिपदा: 10 अक्टूबर लगभग 21:20 से 11 अक्टूबर लगभग 21:31; घटस्थापना सुबह लगभग 06:26–10:17 | कलश स्थापना, अखंड ज्योति/दैनिक दीप, दुर्गा सप्तशती या देवी स्तुति और नौ दिनों तक सात्त्विक पूजा। |
| विजयादशमी / दशहरा | 20 अक्टूबर 2026, मंगलवार | दशमी 20 अक्टूबर 12:50 से 21 अक्टूबर 14:11; विजय मुहूर्त उज्जैन में लगभग 14:07–14:53 | शमी/अपराजिता पूजन, आयुध या कार्य-उपकरण का सम्मान, रामलीला और रावण-दहन की परंपरा। |
| शरद पूर्णिमा / कोजागरी पूर्णिमा | 25 अक्टूबर 2026, रविवार | पूर्णिमा: 25 अक्टूबर 11:55 से 26 अक्टूबर 09:41 | रात्रि में चंद्र दर्शन, खीर का भोग और परिवार के साथ शांत पूजा। |
| करवा चौथ | 29 अक्टूबर 2026, गुरुवार | चतुर्थी: 29 अक्टूबर 01:06 से 22:09; उज्जैन में पूजा प्रदोषकाल में लगभग 17:50–19:05, चंद्रोदय लगभग 20:33 | व्रत रखने वाले परिवार की परंपरा अनुसार संकल्प, करवा माता/गौरी पूजन, कथा और चंद्र दर्शन के बाद व्रत खोलते हैं। |
| धनतेरस / धनत्रयोदशी | 6 नवंबर 2026, शुक्रवार | त्रयोदशी: 10:30 से अगले दिन 10:47; पूजा मुहूर्त 18:17–20:15; प्रदोष 17:46–20:20 | लक्ष्मी-कुबेर और धन्वंतरि पूजन, यमदीप दान और आवश्यकता के अनुसार उपयोगी धातु/बर्तन आदि खरीदना। |
| दीपावली / लक्ष्मी पूजा | 8 नवंबर 2026, रविवार | अमावस्या: 11:27 से 9 नवंबर 12:31; लक्ष्मी पूजा 18:09–20:07; प्रदोष 17:45–20:19 | घर की स्वच्छता, दीप सज्जा, लक्ष्मी-गणेश-सरस्वती पूजन, बही-खाता/व्यवसाय पूजन और परिवार के साथ दीपोत्सव। |
| गोवर्धन पूजा / अन्नकूट | 10 नवंबर 2026, मंगलवार | प्रतिपदा 9 नवंबर 12:31 से 10 नवंबर 14:00 | श्रीकृष्ण और गोवर्धन पूजा, गौ-सेवा और अन्नकूट भोग की परंपरा। |
| भाई दूज / यम द्वितीया | 11 नवंबर 2026, बुधवार | द्वितीया 10 नवंबर 14:00 से 11 नवंबर 15:53; अपराह्न तिलक लगभग 13:17–15:31 | बहन भाई को तिलक करती है, आरती और मिठाई के साथ पारिवारिक मिलन होता है। |
| छठ पूजा | 15 नवंबर 2026, रविवार | षष्ठी: 14 नवंबर देर रात से 16 नवंबर तड़के तक; मुख्य संध्या अर्घ्य 15 नवंबर | सूर्य उपासना, स्वच्छता, व्रत और अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य; अगली सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य देकर पर्व पूर्ण होता है। |
| देवउठनी एकादशी | 20 नवंबर 2026, शुक्रवार | कार्तिक शुक्ल एकादशी | भगवान विष्णु की पूजा, दीपदान और विवाह/मांगलिक कार्यों के मौसम के आरंभ की पारंपरिक मान्यता। |
| तुलसी विवाह | 21 नवंबर 2026, शनिवार | देवउठनी के बाद द्वादशी पर प्रमुख आयोजन | तुलसी और शालिग्राम/विष्णु का प्रतीकात्मक विवाह, घर में दीप और मंगल गीत। |
| कार्तिक पूर्णिमा / देव दीपावली | 24 नवंबर 2026, मंगलवार | पूर्णिमा: 23 नवंबर 23:42 से 24 नवंबर 20:23 | स्नान, दीपदान, मंदिर दर्शन और नदी/घाट पर दीप जलाने की परंपरा। |
| गीता जयंती / मोक्षदा एकादशी | 20 दिसंबर 2026, रविवार | एकादशी: 19 दिसंबर 22:09 से 20 दिसंबर 20:14 | श्रीमद्भगवद्गीता पाठ, अध्यायों का अध्ययन और विष्णु/कृष्ण पूजा। |
| दत्तात्रेय जयंती / मार्गशीर्ष पूर्णिमा | 23 दिसंबर 2026, बुधवार | पूर्णिमा: 23 दिसंबर 10:47 से 24 दिसंबर 06:57 | भगवान दत्तात्रेय का पूजन, गुरु स्मरण, भजन और दान। |
2027 हिंदू त्योहार कैलेंडर: प्रमुख पर्व, तिथि और मुहूर्त
2027 में कुछ पर्व सामान्य तारीख से एक दिन आगे-पीछे दिखाई दे सकते हैं, क्योंकि उनका निर्णय तिथि के सूर्योदय, प्रदोष या निशीथ में रहने से होता है। नीचे प्रमुख त्योहारों का उज्जैन-आधारित उपयोगी कैलेंडर दिया गया है।
| पर्व | तारीख | तिथि / मुहूर्त | मुख्य परंपरा |
|---|---|---|---|
| मकर संक्रांति | 15 जनवरी 2027, शुक्रवार | संक्रांति क्षण 14 जनवरी 21:14; सूर्योदय बाद पुण्यकाल, संदर्भ लगभग 07:09–18:03; महापुण्यकाल लगभग 07:09–08:58 | सूर्य अर्घ्य, तिल-गुड़, दान और स्नान। |
| वसंत पंचमी / सरस्वती पूजा | 11 फरवरी 2027, गुरुवार | सरस्वती पूजा 07:02–12:41; पंचमी 11 फरवरी 03:04 से 12 फरवरी 03:18 | माँ सरस्वती पूजन, पुस्तक/वाद्य पूजन, पीले वस्त्र और शिक्षा से जुड़े संकल्प। |
| महाशिवरात्रि | 6 मार्च 2027, शनिवार | चतुर्दशी लगभग 6 मार्च 12:03 से 7 मार्च 13:46; निशीथ पूजा लगभग 7 मार्च 00:12–01:01 | शिवलिंग अभिषेक, बिल्वपत्र, मंत्र-जप और चार प्रहर पूजा की परंपरा। |
| होलिका दहन | 21 मार्च 2027, रविवार | पूर्णिमा 21 मार्च 18:21 से 22 मार्च 16:13; उज्जैन क्षेत्र में प्रदोषकालीन दहन लगभग 18:39–21:01 | होलिका पूजन के बाद दहन; स्थानीय प्रशासन और अग्नि-सुरक्षा नियमों का पालन करें। |
| रंगवाली होली | 22 मार्च 2027, सोमवार | धुलेंडी / रंगोत्सव | गुलाल, परिवार-मित्रों से मिलना और पारंपरिक पकवान; सुरक्षित व त्वचा-अनुकूल रंग बेहतर विकल्प हैं। |
| राम नवमी | 15 अप्रैल 2027, गुरुवार | नवमी 14 अप्रैल 15:23 से 15 अप्रैल 13:20; मध्याह्न पूजा 11:11–13:43, मध्य क्षण 12:27 | श्रीराम जन्मोत्सव, रामायण पाठ, भजन और मध्याह्न पूजा। |
| हनुमान जयंती | 20 अप्रैल 2027, मंगलवार | चैत्र पूर्णिमा; पूजा सुबह या संध्या में स्थानीय परंपरा अनुसार | हनुमान चालीसा/सुंदरकांड, सिंदूर-चोला की मंदिर परंपरा और प्रसाद। |
| अक्षय तृतीया | 9 मई 2027, रविवार | तृतीया 8 मई 11:42 से 9 मई 09:03; उज्जैन क्षेत्र में सुबह सूर्योदय से 09:03 तक पूजा | विष्णु-लक्ष्मी पूजन, दान और शुभ कार्य; खरीदारी करना अनिवार्य धार्मिक नियम नहीं है। |
| गुरु पूर्णिमा | 18 जुलाई 2027, रविवार | पूर्णिमा: 17 जुलाई 18:48 से 18 जुलाई 21:14 | गुरु, शिक्षक और ज्ञान-परंपरा के प्रति कृतज्ञता, पूजा और अध्ययन। |
| रक्षा बंधन | 17 अगस्त 2027, मंगलवार | पूर्णिमा 16 अगस्त 10:28 से 17 अगस्त 12:58; भद्रा पिछली रात समाप्त, इसलिए सुबह से 12:58 तक राखी का प्रमुख समय | राखी, तिलक, मिठाई और भाई-बहन का पारिवारिक मिलन। |
| श्रीकृष्ण जन्माष्टमी | 25 अगस्त 2027, बुधवार | अष्टमी 24 अगस्त 20:24 से 25 अगस्त 19:19; रोहिणी 25 अगस्त 12:27 से 26 अगस्त 11:42 | कृष्ण जन्मोत्सव, झांकी, भजन और व्रत। स्मार्त/वैष्णव परंपरा में पालन की तारीख अलग हो सकती है। |
| हरतालिका तीज | 3 सितंबर 2027, शुक्रवार | शुक्ल तृतीया 14:18 तक; सुबह पूजा प्रमुख | गौरी-शंकर पूजा, कथा और परिवार की परंपरा अनुसार व्रत। |
| गणेश चतुर्थी | 4 सितंबर 2027, शनिवार | उज्जैन में चतुर्थी 12:25 तक; मध्याह्न पूजा लगभग 11:10–12:25 | गणपति स्थापना, दूर्वा-मोदक भोग, आरती और पर्यावरण-सम्मत प्रतिमा/विसर्जन। |
| अनंत चतुर्दशी / गणेश विसर्जन | 14 सितंबर 2027, मंगलवार | भाद्रपद शुक्ल चतुर्दशी | अनंत भगवान की पूजा और गणेश प्रतिमाओं का श्रद्धापूर्वक विसर्जन। |
| शारदीय नवरात्रि | 30 सितंबर 2027, गुरुवार | घटस्थापना सुबह; शहर-विशिष्ट सटीक विंडो पर्व के नज़दीक पुनः जाँचें | कलश स्थापना, नौ दुर्गा पूजन, गरबा/डांडिया और सात्त्विक साधना। |
| विजयादशमी / दशहरा | 9 अक्टूबर 2027, शनिवार | दशमी 9 अक्टूबर 09:01 से 10 अक्टूबर 11:40; विजय मुहूर्त उज्जैन क्षेत्र में लगभग 14:20–15:05 | शमी/अपराजिता पूजा, आयुध पूजन, रामलीला और विजय का उत्सव। |
| शरद पूर्णिमा / कोजागरी | 14 अक्टूबर 2027 की रात्रि | पूर्णिमा 14 अक्टूबर 18:49 से 15 अक्टूबर 19:16; रात्रि पूजा 14 अक्टूबर | चंद्र दर्शन, खीर भोग और शांत रात्रि पूजन। |
| करवा चौथ | 18 अक्टूबर 2027, सोमवार | चतुर्थी 18 अक्टूबर 17:51 से 19 अक्टूबर 16:42; पूजा प्रदोष में, चंद्रोदय समय उज्जैन में उसी दिन पुनः जाँचें | करवा/गौरी पूजा, कथा और चंद्र दर्शन के बाद व्रत खोलने की परंपरा। |
| धनतेरस | 27 अक्टूबर 2027, बुधवार | त्रयोदशी 01:03 से 22:49; पूजा प्रदोष व स्थिर लग्न में—उज्जैन में लगभग शाम 19:00 के आसपास शुरू होने वाला समय उपयोगी संदर्भ है | लक्ष्मी-कुबेर/धन्वंतरि पूजन, यमदीप और उपयोगी वस्तु की खरीद। |
| दीपावली / लक्ष्मी पूजा | 29 अक्टूबर 2027, शुक्रवार | अमावस्या 28 अक्टूबर 20:47 से 29 अक्टूबर 19:05; इसलिए मुख्य प्रदोष पूजा अमावस्या समाप्ति 19:05 से पहले रखना महत्वपूर्ण; उज्जैन का सटीक स्थानीय विंडो नज़दीक पुनः जाँचें | दीप, रंगोली, लक्ष्मी-गणेश पूजन, व्यवसायिक बही-खाता पूजा और परिवार का दीपोत्सव। |
| गोवर्धन पूजा / अन्नकूट | 30 अक्टूबर 2027, शनिवार | कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा | गोवर्धन/कृष्ण पूजा, गौ सेवा और अन्नकूट। |
| भाई दूज | 31 अक्टूबर 2027, रविवार | द्वितीया 30 अक्टूबर 17:51 से 31 अक्टूबर 17:12; उज्जैन क्षेत्र में अपराह्न तिलक लगभग 13:14–15:30 | बहन द्वारा भाई का तिलक, आरती, मिठाई और उपहार। |
| छठ पूजा | 4 नवंबर 2027, गुरुवार | मुख्य संध्या अर्घ्य 4 नवंबर | सूर्य उपासना, नदी/जलाशय पर संध्या और प्रातः अर्घ्य। |
| देवउठनी एकादशी | 10 नवंबर 2027, बुधवार | कार्तिक शुक्ल एकादशी | विष्णु पूजा, दीपदान और मांगलिक कार्यों के पुनः आरंभ की परंपरा। |
| तुलसी विवाह | 11 नवंबर 2027, गुरुवार | कार्तिक शुक्ल द्वादशी | तुलसी-शालिग्राम विवाह, मंडप सज्जा, गीत और प्रसाद। |
| देव दीपावली | 13 नवंबर 2027, शनिवार की रात्रि | कार्तिक पूर्णिमा पर्व-क्रम; पूर्णिमा 14 नवंबर तक | घाट/मंदिर/घर में दीपदान और शिव-विष्णु पूजा। |
| कार्तिक पूर्णिमा | 14 नवंबर 2027, रविवार | कार्तिक शुक्ल पूर्णिमा | स्नान, दान, दीपदान और देव दर्शन। |
| विवाह पंचमी | 3 दिसंबर 2027, शुक्रवार | मार्गशीर्ष शुक्ल पंचमी | श्रीराम-सीता विवाह प्रसंग, रामायण पाठ और मंदिर उत्सव। |
| गीता जयंती / मोक्षदा एकादशी | 9 दिसंबर 2027, गुरुवार | मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी | गीता पाठ, कृष्ण-विष्णु पूजा और अध्यात्मिक अध्ययन। |
| दत्तात्रेय जयंती | 13 दिसंबर 2027, सोमवार | मार्गशीर्ष पूर्णिमा | दत्तात्रेय पूजा, गुरु स्मरण, भजन और दान। |
2027 में शादी और मांगलिक कार्यों की योजना बना रहे हैं?
त्योहार की तिथि और विवाह मुहूर्त अलग विषय हैं। अगर आपका उद्देश्य शादी, सगाई या दूसरे मांगलिक कार्यक्रम की तारीख तय करना है, तो हमारी विवाह शुभ मुहूर्त गाइड भी देखें। विवाह के लिए केवल त्योहार या “शुभ दिन” देखकर तारीख तय करने के बजाय परिवार की परंपरा और व्यक्तिगत कुंडली की आवश्यकता होने पर जानकार पंडित से सलाह लेना बेहतर रहता है।
त्योहार की तारीख अलग-अलग वेबसाइट पर अलग क्यों दिखती है?
हिंदू पंचांग में दिन केवल रात 12 बजे से नहीं बदलता। किसी पर्व के लिए यह देखा जाता है कि संबंधित तिथि सूर्योदय, मध्याह्न, प्रदोष, निशीथ या चंद्रोदय के समय मौजूद है या नहीं। उदाहरण के लिए दीपावली में अमावस्या और प्रदोष, जन्माष्टमी में अष्टमी तथा निशीथ, और करवाचौथ में चतुर्थी के साथ चंद्रोदय महत्वपूर्ण होता है। इसी कारण दिल्ली, उज्जैन, मुंबई या विदेश में एक ही पर्व का पूजा समय अलग हो सकता है।
उज्जैन को आधार क्यों रखा गया है?
इस लेख के समय-संदर्भ के लिए एक ही शहर चुनना जरूरी था, ताकि अलग-अलग शहरों के मुहूर्त आपस में न मिलें। हमने उज्जैन, मध्य प्रदेश को आधार रखा है। इसका मतलब यह नहीं कि पूरे भारत में हर पूजा का समय बिल्कुल यही होगा। तारीख अधिकांश जगह समान रह सकती है, लेकिन सूर्योदय, सूर्यास्त, प्रदोष और चंद्रोदय के कारण मिनटों का अंतर स्वाभाविक है।
त्योहार मनाते समय एक सरल बात याद रखें
पर्व का उद्देश्य केवल “सही मिनट” पकड़ना नहीं है। घर की परंपरा, स्वच्छता, श्रद्धा, परिवार के साथ समय और दूसरों के प्रति संवेदनशीलता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। पूजा-विधि बहुत विस्तृत न कर पाएं तो भी अपने इष्ट का स्मरण, दीप, प्रसाद और शांत मन से की गई प्रार्थना पर्व को अर्थपूर्ण बना सकती है।
FAQ: 2026-2027 त्योहार कैलेंडर
क्या इस लेख के सभी मुहूर्त पूरे भारत के लिए समान हैं?
नहीं। आधार शहर उज्जैन है। विशेष रूप से चंद्रोदय, सूर्योदय, प्रदोष और निशीथ से जुड़े समय शहर के अनुसार बदलते हैं।
क्या 2027 के समय बाद में बदल सकते हैं?
खगोलीय तिथि गणना पहले से उपलब्ध रहती है, लेकिन व्यवहारिक पूजा समय के लिए अपने शहर का स्थान-विशिष्ट पंचांग पर्व के करीब दोबारा देखना समझदारी है। हमने जहाँ सटीक उज्जैन समय उपलब्ध था वहाँ दिया है और जहाँ केवल क्षेत्रीय संदर्भ मिला, वहाँ उसे लगभग/पुनः जाँच योग्य लिखा है।
स्मार्त और वैष्णव जन्माष्टमी अलग क्यों हो सकती है?
दोनों परंपराओं में अष्टमी, रोहिणी, निशीथ और अगले सूर्योदय को महत्व देने के नियम अलग हो सकते हैं। इसलिए अपने परिवार या मंदिर की परंपरा के अनुसार पालन करें।
क्या खरीदारी के बिना धनतेरस या अक्षय तृतीया अधूरी मानी जाती है?
नहीं। खरीदारी लोकप्रिय सामाजिक परंपरा है; पूजा, दान, स्वच्छता और कृतज्ञता भी पर्व का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। अनावश्यक खर्च करना जरूरी नहीं है।
अंतिम अपडेट: सितंबर 2026. स्थान आधार: उज्जैन, मध्य प्रदेश. पंचांग-आधारित समय स्थान के अनुसार बदल सकता है।
